Bhartiya Bhasha, Siksha, Sahitya evam Shodh

  ISSN 2321 - 9726 (Online)   New DOI : 10.32804/BBSSES

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समान कारक होने पर भी विभक्ति-भेद से अर्थभेद की सूक्ष्मेक्षिका

    2 Author(s):  DR. JAGMOHAN, DR. DOLAMANI ARYA

Vol -  13, Issue- 3 ,         Page(s) : 11 - 14  (2022 ) DOI : https://doi.org/10.32804/BBSSES

Abstract

पाणिनीय व्याकरण को मुख्य रूप से आकृतिमूलक व्याकरण माना जाता है । इस विषय में पाणिनि का “अथ शब्दानुशासनम्” यह सूत्र स्वयं प्रमाण है, जिसमें शब्दों के अनुशासन की बात कही गयी है । यह अनुशासन किस प्रकार से किया जायेगा ? इस विषय का स्पष्टीकरण करते हुए काशिकाकार कहते हैं कि सामान्य और विशेष वाले सूत्रों से प्रकृति-प्रत्यय आदि के विभाग की कल्पना के द्वारा शब्दों का अनुशासन किया जायेगा ।

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